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पर इसके लिए हमें इस नागकन्या की सहायता लेनी पड़ी थी. अहिरावण इसे बलपूर्वक उठा लाया था. वह आपसे विवाह करना चाहती है. कृपया उससे विवाह कर अपने साथ ले चलें. इससे उसे भी मुक्ति मिलेगी.

श्रीराम हनुमानजी की बात सुनकर चकराए. इससे पहले कि वह कुछ कह पाते हनुमानजी ने ही कह दिया- भगवन आप तो मुक्तिदाता हैं. अहिरावण को मारने का भेद इसी ने बताया है. इसके बिना हम उसे मारकर आपको बचाने में सफल न हो पाते.

कृपानिधान इसे भी मुक्ति मिलनी चाहिए. परंतु आप चिंता न करें. हम सबका जीवन बचाने वाले के प्रति बस इतना कीजिए कि आप बस इस पलंग पर बैठिए बाकी का काम मैं संपन्न करवाता हूं.

हनुमानजी इतनी तेजी से सारे कार्य करते जा रहे थे कि इससे श्रीरामजी और लक्ष्मणजी दोनों चिंता में पड़ गये. वह कोई कदम उठाते कि तब तक हनुमानजी ने भगवान राम की बांह पकड़ ली.

हनुमान जी ने भावावेश में प्रभु श्रीराम की बांह पकड़कर चित्रसेना के उस सजे-धजे विशाल पलंग पर बिठा दिया. श्रीराम कुछ समझ पाते कि तभी पलंग की खोखली पाटी चरमराकर टूट गयी.

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