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इतना कहकर वह चले गए! समय आने पर वह लड़का मरकर यमराज के पास पहुंचा और पूछा –मेरे कर्मो का हिसाब करने से पहले आप मुझे यह बताइए कि एक बार राधा नाम लेने की क्या महिमा है?

यमराज ने कहा -मुझे नहीं पता कि क्या महिमा है, शायद इन्द्रदेव को पता होगा, चलो उनसे ही पूछते हैं! जब उस लड़के ने देखा कि यमराज अपनी अज्ञानता के कारण कुछ संकोच में पड़े हैं तो वह फैल गया.

उसने कहा- महाराज मै ऐसे नहीं जाऊंगा. मेरे कर्मों का हिसाब जब तक नहीं हुआ है तब तक मैं आपका मेहमान हूं. सम्मान से पालकी मंगाइए तभी चलूंगा. पालकी आ गयी,

फिर उसने कहार से कहा- तुम हटो, यमराजजी लगेंगे क्योंकि इन्होंने आज तक बिना राधा नाम की महिमा जाने सबके कर्मों का हिसाब करने की भूल की है! हारकर यमराज पालकी में लग गए और इंद्र के पास गए.

इंद्र ने पूछा – यमराजजी कोई खास पुण्यात्मा है जो इसको आपने पालकी में उठा रखा है? यमराज ने कहा-यह पृथ्वी से आया है और एक बार राधा नाम लेने की क्या महिमा है, यह पूछ रहा है! मैं हारकर पालकी में लगा हूं, अब आप बताइए तो मुक्त होऊं.

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