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जैसे भगवान पश्चातापवश श्मशान में रहते हैं वैसे मैं भी इस वन में एक शाप के कारण हूं. असल में तो मैं कुबेर का प्रिय दास था. मेरा नाम तब सुप्रतीक था. एक दिन कुबेर ने मुझे एक राक्षस के साथ देख लिया.
गंधर्व की दोस्ती और राक्षस से? क्रोध में आकर उन्होंने बिना कुछ समझे बुझे मुझे पिशाच बन जाने और श्मशान में रहने का शाप दे दिया. जब मेरा भाई बहुत रोया-गिड़गिड़ाया तो उन्होंने शाप मुक्ति का उपाय बताया.
कुबेर ने कहा- जब मैं पुष्पदंत से भगवान शिव द्वारा कही गयी कथा सुन लूंगा और उस सुनी कथा को माल्यवान को सुना दूंगा तो मेरी मुक्ति होगी. माल्यवान को तो बाद में खोजेंगे, पहले पुष्पदंत में मिलना ज़रूरी है.
मुझे संकेत मिला कि पुष्पदंत से मुलाकात विंध्य के जंगलों में होगी. तब से मैं श्मशान से निकल इस भयानक बियावान में उसी का इंतज़ार कर रहा हूं. यह सुनते ही पुष्पदंत को अपना अतीत याद आ गया.
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mujhye vagwan ke kahani aacha lagtahen