हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:fb]
आपके अंधाधुंध शिकार का शिकार एक हिरण भी हुआ. दरअसल वह हिरण नहीं बल्कि एक मुनि थे जो हिरण का रूप धरकर वन में विचर रहे थे. तीर लगते ही वह मर गए.

आप खुश हुए कि आपने हिरण मार लिया पर पास में जाकर देखा तो वहां एक तेजस्वी ब्राह्मण मरा पड़ा था. यह देख आप दुःखी हो अपने महल लौट आए.

आपने यह बात किसी को बता भी दी. समय बीतने पर एक दिन अचानक आपको याद आया कि मैं तो ब्रह्महत्या का दोषी हूं. उसी रात आपने संकल्प लिया कि ब्रह्महत्या से मुक्ति पाने के लिए कुछ भी करुंगा.

इसके लिए आपने एकादशी का उपवास रखा. अनेक व्रत किए. विष्णु भगवान की प्रसन्नता के लिए गोदान भी किया. एक दिन पेट में भयानक दर्द उठा. कोई औषधि काम न आ सकी. आपके प्राण निकल गए.

आपकी रानी का नाम था नारायणी. आखिरी समय तुमने उसे ही पुकारा था. नारायण कहते कहते आपके प्राण निकले थे. अंत समय में भगवान विष्णु का नाम लिया इसलिए विष्णु लोक में निवास मिला.

उस समय मैं तुम्हारे शरीर में एक ब्रह्मराक्षस के रूप में रह रहा था. इसलिए यह सारी बात भलीभांति जानता हूं. मैं भयंकर ब्रह्मराक्षस था और आपको भीषण कष्ट देना चाहता था पर आप तो विष्णु लोक आ गये थे.
शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here