धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-
[sc:fb]
जप की माला, जप स्थान और जप के अन्य विधानः
महादेवी के पूछने पर शिवजी ने बताया-
– 25 मनकों की माला मोक्ष के लिए होती है. 27 मणियों की माला पुष्टि के लिए जानना चाहिए,
– 30 मनकों की माला धन संपदा के लिए जानना चाहिए.
– 50 मनकों की माला अभिचार कर्म के लिए होती है.
– 108 की माला सर्वफल के लिए होती है.
[irp posts=”6945″ name=”ऐसे करेंगे शिवलिंग की पूजा तो शीघ्र रीझ जाएंगे शिवजी”]
जप की दिशाः
पूर्व की ओर मुख करके किया गया जप वशीकरण की शक्ति देने वाला होता है. दक्षिण की ओर मुख करके किया गया जप अभिचार कर्म की शक्ति देने वाला होता है. पश्चिम की ओर मुख करके किए गए जप को धन प्रदान करने वाला जानना चाहिए. उत्तर की ओर मुख करके किया गया जप शांति प्रदान करने वाला होता है.
जप में अंगुलियों का प्रयोगः
अंगूठे को मोक्ष देने वाला जानना चाहिए.
तर्जनी अंगुली शत्रु का नाश करने वाली तथा मध्यमा धन प्रदान करने वाली है.
अनामिका शांति प्रदान करती है.
जप कार्य में कनिष्ठा रक्षणीय होती है.
अंगूठे से अन्य अंगुलियों के साथ मंत्र का जप करना चाहिए क्योंकि बिना अंगूठे के किया जपकर्म निष्फल होता है.
[irp posts=”5853″ name=”शिवलिंग या शिव की मूर्ति, पूजा के लिए कौन है श्रेष्ठ?”]
यह सब जानने के बाद माता पार्वती ने शिवजी से पूछा- हे देवाधिदेव! सबसे उत्तम यज्ञ जप यज्ञ को क्यों कहा गया है? जप की महिमा के बारे में बताएं. क्या जपकर्म से सारे विधान पूरे हो सकते हैं? यदि जप इतना प्रभावी है तो इसकी क्या विधि है? मुझे यह सब बताकर कृपा करें.
महादेव ने जप यज्ञ अर्थात जप की महिमा बतानी शुरू की.
[sc:fb]
जप यज्ञ ही सर्वश्रेष्ठ यज्ञ हैः
शिवजी बोले- हे महादेवी! जप यज्ञ सभी यज्ञों से श्रेष्ठ है. सभी यज्ञ हिंसा के साथ हुआ करते हैं. पत्र-पुष्प, धन-धान्य या किसी भी वस्तु को प्राप्त करने के लिए कोई न कोई जीव को कष्ट तो होता है किंतु जप यज्ञ बिना हिंसा के होता है. जितने भी अनुष्ठान यज्ञ दान तथा तप हैं वे सब जप यज्ञ की 16 वीं कला के बराबर भी नहीं है. अतः जपयज्ञ को ही सर्वश्रेष्ठ मानना चाहिए.
पंचाक्षरी मंत्र के सवा करोड़ जप को विधि-विधान से जीवनकाल में पूर्ण कर लेने वाला व्यक्ति मुझे अत्यंत प्रिय है. उसे मेरे शिवलोक में उसकी इच्छानुसार प्रवेश की अनुमति रहती है. वह अपने मन अनुसार मेरे दर्शन कर सकता है.
जप के प्रारंभ और अंत में तीन-तीन प्राणायाम करना चाहिए. अंत में एक सौ आठ बार बीजमंत्र का जप करना चाहिए. श्वास रोककर चालीस बार जप करना चाहिए. यह पंचाक्षर मंत्र का प्राणायाम कहलाता है. प्राणायाम से शीघ्र ही सभी पापों का नाश होता है एवं इंद्रियों का निग्रह होता है. अतः प्राणायाम अवश्य करना चाहिए.
वाचिक जप, उपांशु जप और मानस जप यज्ञः
वाचिक जप यज्ञ से सौ गुना ज्यादा महत्व उपांशु जप यज्ञ का है. मानस जप यज्ञ हजार गुना फलदाई कहा गया है.
साधक स्पष्ट पद अक्षरों वाले शब्दों के साथ उदात्त अनुदात्त तथा स्वरित स्वर में वाणी के द्वारा मंत्रों का उच्चारण करता है तो वह जप यज्ञ वाचिक होता है.
यदि साधक धीमे स्वर में मंत्र का उच्चारण करता है और कुछ कुछ होठों में चलाता है तथा उसे कुछ-कुछ कान में सुनाई पड़ता है तो वह जब उपांशु जप कहा जाता है.
यदि साधक मन में अक्षर समूह के वर्ण से वर्ण तथा पद से पद शब्दार्थ का बार-बार चिंतन करता है तो जप को मानस जप कहा गया है.
तीनों जप यज्ञ में उत्तरोत्तर श्रेष्ठ है. यानी वाचिक से उपांशु श्रेष्ठ है और उपांशु से मानस श्रेष्ठ है. इस प्रकार मानस जप यज्ञ सर्वश्रेष्ठ है.
-राजन प्रकाश
धार्मिक अभियान प्रभु शरणम् के बारे में दो शब्दः
सनातन धर्म के गूढ़ रहस्य, हिंदूग्रथों की महिमा कथाओं ,उन कथाओं के पीछे के ज्ञान-विज्ञान से हर हिंदू को परिचित कराने के लिए प्रभु शरणम् मिशन कृतसंकल्प है. देव डराते नहीं. धर्म डरने की चीज नहीं हृदय से ग्रहण करने के लिए है. तकनीक से सहारे सनातन धर्म के ज्ञान के देश-विदेश के हर कोने में प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से प्रभु शरणम् मिशन की शुरुआत की गई थी. इससे देश-दुनिया के कई लाख लोग जुड़े और लाभ उठा रहे हैं. आप स्वयं परखकर देखें. आइए साथ-साथ चलें; प्रभु शरणम्!
प्रभु शरणम् का लिंकः-
वेद-पुराण-ज्योतिष-रामायण-हिंदू व्रत कैलेंडेर-सभी व्रतों की कथाएं-व्रतों की विधियां-रामशलाका प्रश्नावली-राशिफल-कुंडली-मंत्रों का संसार. क्या नहीं है यहां! सब फ्री भी है. एक बार देखें जरूर…
Android ऐप्प के लिए यहां क्लिक करें
लिंक काम न करता हो तो प्लेस्टोर में सर्च करें-PRABHU SHARNAM
प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना के लिए नोटिफिकेशन को सब्सक्राइव कर लें.
[irp posts=”5773″ name=”मांसाहारी हैं आप या शाकाहारी, पढें. जीवन में कभी न भूलेंगे ये कथा”]
इस लाइऩ के नीचे फेसबुक पेज का लिंक है. इसे लाइक कर लें ताकि आपको पोस्ट मिलती रहे. धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-
हम ऐसी कहानियां देते रहते हैं. Facebook Page Like करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा: Please Like Prabhu Sharnam Facebook Page
धार्मिक चर्चा करने व भाग लेने के लिए कृपया प्रभु शरणम् Facebook Group Join करिए: Please Join Prabhu Sharnam Facebook Group
Your Comment नम: शिवाय ।
Om Namah Shivay. Om Sri UmaMaheshwaravyam Namah