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समस्त देवी देवता श्रीगणेश को पूर्ण भक्ति भाव से प्रसन्न करने के लिए उपासना करने लगे. उनकी तपस्या से संतुष्ट होकर भगवान महोदर प्रकट हुए. देवताओं और मुनियों ने करूणापूर्वक महोदर की स्तुति की.

भगवान महोदर ने कहा कि मैं आततायी मोहासुर का वध करूंगा करके आपके कष्ट दूर करूंगा. आप निश्चिंत होकर जाएं. ऐसा कहकर मूषक पर सवार भगवान महोदर मोहासुर से युद्ध करने के लिए चल दिए.

यह समाचार देवर्षि नारद ने मोहासुर को दिया तथा अनंत पराक्रमी समर्थ महोदर का स्वरूप भी उसे समझाया. दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने भी उसे भगवान महोदर की शरण लेने का परामर्श दिया.

उसी समय भगवान महोदर का दूत बनकर भगवान विष्णु मोहासुर के पास गए. उन्होंने मोहसुर से कहा- तुम्हें अनन्त शक्ति- संपन्न भगवान महोदर से मित्रता कर लेनी चाहिए.

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