[sc:fb]
तीनों महाशक्तियों के मिलन के उस स्वरूप को उन्होंने त्रिकुटा नाम दिया. त्रिकुटा का स्वभाव जन्म से ही अनूठा था. बचपन से ही वह पूजा पाठ और धार्मिक कार्यक्रमों को देख कर प्रसन्न होती. अभी दसवां साल शुरु भी नहीं हुआ था कि त्रिकुटा को यह पता चल गया था कि भगवान विष्णु ने भगवान श्रीराम के रूप में धरती पर अवतार ले लिया है.
त्रिकुटा ने यह व्रत ले लिया कि वह भगवान श्रीराम से ही विवाह करेगी अन्यथा आजीवन अविवाहित रहेगी. त्रिकुटा ने अपने पिता से कहा कि वह रामेश्वरम के तट पर रहकर तपस्या करना चाहती हैं. शर्त के मुताबिक रत्नाकर ने उसे नहीं रोका.
[irp posts=”5936″ name=”विज्ञान आधारित है एकादशी व्रत पढ़ें, गर्व से सीना फूल जाएगा”]
दस बरस की उम्र से ही त्रिकुटा, समुद्रतट पर एक कुटी बना कर रहने लगी. वह भगवान श्रीराम को पति मानकर उनको पाने के लिए कठोर तप करने लगी. इसी तरह घोर तप करते त्रिकुटा को बहुत बरस बीत गए. सीताहरण के बाद भगवान श्रीराम लक्ष्मण के साथ दलबल लेकर सीता की खोज करते हुए रामेश्वरम् पहुंचे.
श्रीराम को पुल बांधने तक यहां ठहरना था. भगवान एक दिन विचरण कर रहे थे तभी समुद्र तट पर एक तेजस्विनी ध्यानमग्न कन्या को देख बहुत चकित हुए. उस कन्या के ओज और आभा से वह स्थान अलग ही रोशनी से प्रकाशित हो रहा था.
भगवान श्रीराम कौतूहलवश उस कन्या के तपोस्थल तक पहुंचे.
प्रभु ने उस कन्या से पूछा- तुम कौन हो देवी और इतनी कम उम्र में इतना कठोर तप क्यों कर रही हो. ऐसी क्या अभिलाषा है जिसके लिए ऐसा घोर तप करने को विवश हो?
वेद-पुराण-ज्योतिष-रामायण-हिंदू व्रत कैलेंडेर-सभी व्रतों की कथाएं-व्रतों की विधियां-रामशलाका प्रश्नावली-राशिफल-कुंडली-मंत्रों का संसार. क्या नहीं है यहां! एक बार देखिए तो सही…
Android ऐप्प के लिए यहां क्लिक करें
लिंक काम न करता हो तो प्लेस्टोर में सर्च करें-PRABHU SHARNAM
शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.
To fir bhaironath aur dhyanu bhagat ki story, Galat hai.
ऐसा नहीं कहा हमने… मां की लीला तो मां ही जानें…यह कथा एक प्रसिद्ध कथा है. जो मैंने अंत में लिखा भी है. भैरवनाथ की बात भी पोस्ट के अंत में है और आप जो प्रसंग कह रहे हैं उसका भी वर्णन आएगा..
Ma ka kripa sadaeba meray Paribar per rahay .jai Mata Dee
ज्ञान वर्धक
Your Comment JAY MATA DI. JAY MAA. SABHI BHAKTO PE KRIPA DRISHTI RAKHNA MATA. JAY HO.