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देवी भारती की अनुपस्थिति में शास्त्रार्थ विधिवत चलता रहा. कुछ समय पश्चात् देवी भारती लौटीं. उन्हें निर्णय सुनाना था. उन्होंने निर्णायक दृष्टि से दोनों का बारी-बारी से परीक्षण किया और शंकराचार्य को विजयी घोषित कर दिया.
मंडन मिश्र इस निर्णय को स्वीकार करके शांत भाव से थे. पर शास्त्रार्थ के साक्षी दर्शक हैरान थे कि बिना किसी आधार के इस विदुषी ने अपने पति को कैसे परास्त घोषित कर दिया.
एक विद्वान नेँ देवी भारती से नम्रतापूर्वक कहा- आप तो शास्त्रार्थ के मध्य ही चली गई थीँ फिर वापस लौटते ही आपनेँ ऐसा फैसला कैसे दे दिया?
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Shankaracharya ji ne fir 6 mahine kya kiya?