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बुध हिमालय में श्रवणवन पर्वत पर जाकर तपस्या करने लगे. तप से प्रसन्न होकर विष्णु भगवान ने उसे दर्शन दिए. वरदान स्वरूप वैदिक विद्याएं एवं सभी कलाएं प्रदान कीं. शांत विचार होने के कारण वह देवों को प्रिय हुए.
बुध के पुत्र पुरुरवा पर स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी मोहित हो गई और उनसे विवाह किया. उर्वशी पर अधिकार को लेकर इंद्र और पुरुरवा में युद्ध ठन गया था. यह कथा आगे किसी पोस्ट में.
संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली
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