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ब्रह्मा को भय हुआ कि इस युद्ध के कारण कहीं सृष्टि का ही अंत न हो जाए. वह बीच-बचाव कर युद्ध रुकवाने की कोशिश करने लगे. ब्रह्मा तारा के पास गए और समझाया कि उसके प्रेम संबंध के कारण संसार खतरे में है. उसे बृहस्पति के पास चले जाना चाहिए.

तारा चंद्रमा को छोड़ वापस बृहस्पति के पास चली गई. तारा गर्भवती थी. बृहस्पति को पता चला तो उन्होंने तत्काल गर्भत्याग को कहा. गर्भत्याग से बालक का जन्म हुआ. चंद्रमा और बृहस्पति दोनों को बालक को प्राप्त करने की लालसा जागी. दोनों बुध पर दावा करने लगे.

एकबार फिर बृहस्पति और चंद्रमा में ठन गई. ब्रह्मा बीच-बचाव को आए. उन्होंने तारा से पूछा कि यह बालक किसका है लेकिन तारा ने कोई उत्तर नहीं दिया. आखिरकार अपने पिता के कहने पर बृहस्पति उस बालक को चंद्रमा को देने को तैयार हो गए.

चंद्र ने बालक बुध को रोहिणी और कृत्तिका नक्षत्र-रूपी अपनी पत्नियों को पालन-पोषण के लिए सौंप दिया. बड़े होने पर बुध को अपने जन्म की कथा सुनकर शर्म व ग्लानि होने लगी. उसने माता से पूछा कि वह किसका पुत्र है तो माता ने चंद्रमा का नाम लिया.

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