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सभी देवता और ऋषि आश्चर्य में थे. नारद से नहीं रहा गया. वह महादेव के पास आए और उनसे कहा प्रभु इसने ब्रह्माजी के वरदान का बहुत दुष्प्रयोग किया है. इसके तप के पुण्यकर्म नष्ट हो चुके हैं. इसलिए आप अपने क्रोध की अग्नि में भस्म कर दें.

महादेव ने भीषण हुंकार भरी और असुर भीम भस्म हो गया. देवताओं और ऋषियों ने महादेव की स्तुति की और कहा- प्रभु इस राक्षस के कारण यह क्षेत्र निंदित हो गया था. इसलिए आप यहां विराजकर इसे पवित्र करें.

देवों और ऋषियों के आग्रह पर महादेव वहां लोककल्याण के लिए ज्योतिर्लिंग स्वरूप में स्थापित हो गए. उस ज्योतिर्लिंग का नाम भीमाशंकर प्रसिद्ध हुआ. अभी यह महाराष्ट्र में भीमा नदी के किनारे स्थित है.

संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्

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