उसके बाद वे चारों भाई महादेव का अनुष्ठान करने लगे. वे ध्यान में तल्लीन थे कि तभी सेना सहित दूषण वहां पहुंचा. उसने उन्हें डराने के लिए सेवकों से कहा कि इन चारों को बांद लो फिर इनका वध कर देना.
वेदप्रिय के चारों पुत्र उसकी बातों से बिना डरे शिवलिंग की स्तुति कर महादेव का आह्वान करते रहे. जब दूषण ने यह समझ लिया कि उसकी बातों से इनमें भय नहीं हुआ तो उसने स्वयं उन्हें मार डालने का निश्चय किया.
उसने जैसे ही शिवभक्तों के प्राण लेने हेतु तलवार उठाई उठाई. त्योंही उनके द्वारा पूजित उस पार्थिव लिंग की भूमि भयंकर आवाज के साथ फट गई और एक विशाल खाई बन गई.
उस खाई से विकट और भयंकर रूपधारी भगवान शिव साक्षात प्रकट हो गए. दुष्टों का विनाश तथा सज्जनों का कल्याण करने वाले भगवान शिव का रूप काल को भी भयभीत करने वाला था.
महाकाल रूप धारी महादेव ने दैत्यों से कहा- अरे दुष्टों! तुझ जैसे हत्यारों के लिए ही मैंने यह महाकाल स्वरूप लिया है. ऐसा कहते हुए महाकाल भगवान ने अपने हुँकार मात्र से ही दैत्यों को भस्म कर दिया.
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