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कच ने हर प्रकार से देवयानी को समझाने की कोशिश की. अपने प्राणों की बाज़ी लगाने का उद्देश्य भी बताया. धर्मसंगत बातों से उसने देवयानी को बहुत समझाया लेकिन देवयानी हर हाल में कच को हासिल करना चाहती थी.
देवयानी ने कच को कहा कि यदि वह उससे विवाह नहीं करता तो वह उसकी विद्या के निष्फल होने का शाप दे देगी. कच फिर भी अपनी बात से पीछे नहीं हटा. देवयानी ने शाप दे दिया.
क्रोधित कच ने भी देवयानी को शाप दिया कि प्रेम में पागल होकर वह अनैतिक कार्य को उतारू है. इसलिए उसे कोई ब्राह्मण अपनी पत्नीरूप में स्वीकार नहीं करेगा. अपने पति के अनैतिक कार्यों से देवयानी का वैवाहिक जीवन कष्टमय होगा.
शापित कच इंद्र के लोक अमरावती पहुंचा और उसने वह विद्या दूसरे को सिखा दी. इस तरह कच स्वयं तो विद्या का प्रयोग नहीं कर सका लेकिन देवताओं का मनोरथ सफल हुआ.
कच के शाप के कारण ही देवयानी का विवाह किसी ब्राह्मण कुल में नहीं हुआ बल्कि क्षत्रिय राजा ययाति से हुआ. कच के शाप का दूसरा अंश था कि देवयानी का विवाह चरित्रहीन व्यक्ति से होगा.
देवयानी का प्रेम जीवन बहुत विवादित रहा. कल पढ़िए देवयानी के प्रेम और उस कारण शुक्राचार्य की व्यथा की कथाएं.
संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्
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