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कामदेव की स्तुति से भगवान नर नारायण प्रसन्न हुए. उन्होंने योगमाया से एक अद्भुत लीला की. अप्सराओं के साथ कामदेव ने देखा कि साक्षात देवी लक्ष्मी समान रूपवती नारियां नर नारायण की सेवा कर रही हैं.

नर नारायण ने कहा- कामदेव तुम इन स्त्रियों में से किसी एक को मांगकर स्वर्ग में ले जा सकते हो. वह स्त्री स्वर्ग के लिए अनमोल भूषण स्वरूप होगी.

कामदेव ने अप्सराओं में सर्वश्रेष्ठ अप्सरा उर्वशी को चुना. उरू यानी जंघा से उत्पन्न होने के कारण उसका नाम उर्वशी पड़ा. उर्वशी को लेकर कामदेव ने स्वर्ग के लिए प्रस्थान किया.

उन्होंने देवसभा में भगवान नर नारायण की महिमा का गुणगान किया, जिससे इंद्र और भयभीत हो गए. उन्हें पश्चाताप होने लगा और वह भगवान नर नारायण से क्षमा मांगने पहुंचे.

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