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विश्वावसु के अनुरोध पर विद्यापति कुछ दिन वहां अतिथि बनकर रूके. वह भीलों को धर्म और ज्ञान का उपदेश देने लगे. उनके उपदेशों को विश्वावसु तथा ललिता बड़ी रूचि के साथ सुनते थे. ललिता के मन में विद्यापति के लिए अनुराग पैदा हो गया.
विद्यापति ने भी भांप लिया कि ललिता को उनसे प्रेम हो गया है किंतु विद्यापति एक बड़े कार्य के लिए निकले थे. वह जिस कार्य के लिए निकले थे उसका बस एक संकेत मिला था- संगीत के रूप में. परंतु उससे आगे अभी तक कुछ नहीं हुआ, वह प्रेम कर ही नहीं सकते.
ईश्वर को तो अपनी लीला पूरी करनी थी. अचानक एक दिन विद्यापति बीमार हो गए. बीमार क्या मरणासन्न. ऐसा लगा कि अब गए कि तब गए. ललिता ने उनकी सेवा-सुश्रुषा की. उसका लाभ हुआ और विद्यापति स्वस्थ भी हो गए. इससे विद्यापति के मन में भी ललिता के प्रति प्रेम भाव पैदा हो गया.
भील राजकुमारी को बाहर से आए ब्राह्मण से प्रेम हुआ तो यह पिता से छुप न सका. उन्हें अपनी प्रतिष्ठा की चिंता हुई. फिर सोचा यदि यह विद्वान विवाह करके यहीं बस जाए तो सारे भीलों को लाभ होगा. विश्वावसु ने विद्यापति के सामने ललिता से विवाह का प्रस्ताव रखा.
विद्यापति ने इसे स्वीकार कर लिया. दोनों का विवाह हुआ. कुछ दिन दोनों के सुखमय बीते. दांपत्य जीवन से विद्यापति प्रसन्न तो थे पर एक चिंता उन्हें सताती रहती. मुझे राजा ने जिस कार्य के लिए भेजा है वह अधूरा है. पर सूझता ही न था कि आगे क्या करें.
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इस बीच विद्यापति को एक विशेष बात पता चली. विश्वावसु एक पहर रात बाकी रहती तभी उठकर कहीं चला जाता. सूर्योदय के बाद ही लौटता था. कितनी भी विकट स्थिति आए उसका यह नियम कभी नहीं टूटता था. ऐसा वह न जाने कब से करता आया था.
भीलराजा विश्वावसु के इस व्रत पर विद्यापति को आश्चर्य हुआ. उनके मन में इस रहस्य को जानने की इच्छा हुई, आखिर विश्वावसु जाता कहां है. कहीं इसका संबंध उस अभियान से तो नहीं जिसके लिए मैं यहां आ पहुंचा हूं. कहीं ईश्वर मुझे संकेत तो नहीं दे रहे. यह सोचकर विद्यापति परेशान थे.
ललिता ने परेशान देखा तो कारण पूछ लिया. विद्यापति ने ललिता से पूछा- विश्वावसु प्रतिदिन कहां जाते हैं? विकट से विकट परिस्थिति में भी उनका नियम नहीं टूटता ऐसा क्यों? मुझे यह जानने की बड़ी तीव्र इच्छा है. यही सोचकर मैं परेशान हूं.
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ललिता के सामने धर्मसंकट आ गया. वह पति की बात को ठुकरा नहीं सकती थी लेकिन पति जो पूछ रहा था उसे बता नहीं सकती थी. यह उसके वंश की गोपनीय परंपरा से जुड़ी बात थी जिसे खोलना संभव नहीं था.
ललिता ने कहा- स्वामी! यह हमारे कुल का रहस्य है जिसे किसी के सामने खोला नहीं जा सकता. आप मेरे पति हैं, मैं आपको कुल का पुरुष मानते हुए जितना संभव है बताऊंगी.
यहां से कुछ दूरी पर एक गुफा है जिसके अन्दर हमारे कुलदेवता हैं. उनकी पूजा हमारे सभी पूर्वज करते आए हैं. यह पूजा निर्बाध चलनी चाहिए. उसी पूजा के लिए पिताजी रोज सुबह नियमित रूप से जाते हैं.
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HARI ANANT HARI KATHA ANANTA… JAI SHRI JAGNATH BHAGWAN.