January 29, 2026

आत्मविजयी ही विश्वविजेता होता है, राजर्षि नमि के तर्क से नतमस्तक हुए देवदूत- प्रेरक कथा


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राजा नमि राजर्षि हो गए थे. उन्होंने विचार किया कि राजपाट का त्याग करके अब योग-साधना में लीन हो जाना चाहिए. उनकी यह इच्छा सुनकर एक देवदूत उनके पास आए.

देवदूत ने कहा- राजर्षि निमि अपने तप और उत्तम प्रजापालन के गुणों के कारण आपको राजर्षि होने का सम्मान मिला है. राजन! यह पदवी आपको आपके कर्तव्यों के उत्तम पालन के कारण प्राप्त हुआ. मुझे चिंता है कहीं आप कर्तव्य विमुख न हो जाएं.

नमि ने देवदूत से उसकी आशंका का कारण पूछा तो देवदूत बोले- राजा का दायित्व निभाते हुए आपको अपने साम्राज्य को सुरक्षित करना चाहिए. महल की सुरक्षा के लिए मजबूत दरवाजे, दीवारें, उत्तम शस्त्रागार, अमोघ अस्त्र प्राप्त करने चाहिए.

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