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भागवत कथाः जाजलि के शाप से बगुला बन गए हयग्रीव पुत्र उत्कल का श्रीकृष्ण के हाथ उद्धार-बकासुर वध

भागवत कथाः जाजलि के शाप से बगुला बन गए हयग्रीव पुत्र उत्कल का श्रीकृष्ण के हाथ उद्धार-बकासुर वध

jay gopal krishna

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पहले बछड़ों को जल पिलाया गया फिर और सबने स्वयं भी पिया. ग्वालबालों ने देखा कि तालाब के किनारे एक बहुत बड़ा बगुला बैठा उन लोगों को ही देख रहा है.

उसका शरीर इतना विशाल था जैसे लगता था कि इन्द्र के वज्र के प्रहार से किसी विशाल पर्वत से कोई बड़ा पहाड़ का टुकड़ा कटकर गिरा हो. ग्वालबाल उसे देखकर डर गए.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.वह बक नामक असुर था जो बगुले के रूप में रहता था. कंस के भेजे राक्षसों के एक के बाद एक के मारे जाने से कंस भयभीत था. उसने अपने सभी सहयोगियों से सहायता की गुहार लगाई थी.

बकासुर कंस का मित्र था औऱ वह श्रीकृष्ण पर आघात करने आया था. बकासुर की चोंच बड़ी तीखी थी. उसमें हजारों हाथियों का बल था. उसने मौका देखकर झपटा मारा और श्रीकृष्ण को निगल लिया.

ग्वाल-बाल हाकाकार करने लगे. श्रीकृष्ण जब बक के तालु के नीचे पहुंचे, तब उन्होंने योगमाया से अपने शरीर को प्रचंड अग्नि के समान तपना शुरू कर दिया. इससे बकासुर का तालु जलने लगा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.पीड़ा में चिल्लाते हुए बकासुर ने तुरंत ही श्रीकृष्ण को अपने मुख से उगल दिया और क्रोध में भरकर से अपनी कठोर चोंच से उन पर प्रहार करने लगा. भगवान उसके साथ कुछ देर तक ठिठोली करते रहे.

फिर श्रीकृष्ण ने उसकी नुकीली चोंच पकड़ ली और उसे खींचकर फैला दिया. फिर एक चोंच के एक सिरे को पैरों से दबाया और दूसरे को खींचकर उसके दो टुकड़े कर दिए. इस तरह उसका मुख दो हिस्सों में फट गया और उसने प्राण त्याग दिए.

बकासुर वास्तव में है पूर्व जन्म में हयग्रीव का पुत्र उत्कल था. उत्कल बड़ा शराररती था. वह जाजलि मुनि की पर्णकुटी में घुस गया और वहां मछलियां पकड़कर उन्हें मारने लगा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.जाजलि को बड़ा क्रोध आया. उन्होंने उसे शाप दे दिया कि तुम बक की तरह मछलियां पकड़ रहे हो इसलिए जाओ बक ही हो जाओ. उत्कल ने मुनि से क्षमा मांगी और शापमुक्त करने को कहा.

जाजलि ने कहा कि उनका शाप व्यर्थ नहीं जा सकता लेकिन मेरा वरदान तुम्हारे लिए कल्याणकारी सिद्ध होगा. स्वयं श्रीकृष्ण तुम्हारा उद्धार करेंगे और तुम्हें जन्म-मृत्यु के बंधनों से मुक्त करके मोक्ष दिलाएंगे.

जब बलराम एवं अन्य बालकों ने देखा कि श्रीकृष्ण बगुले के मुंह से निकलकर वापस आ गए हैं तो वे खुशी से नाचने लगे. इसके बाद अपने-अपने बछड़े हांककर सब वृंदावन में आए और वहां उन्होंने घर के लोगों को सारी घटना कह सुनाई.

संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्

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