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रामेश्वर ज्योतिर्लिंगः भगवान श्रीराम ने महादेव को प्रसन्न कर मांगा था रावण पर विजय का वरदान

रामेश्वर ज्योतिर्लिंगः भगवान श्रीराम ने महादेव को प्रसन्न कर मांगा था रावण पर विजय का वरदान

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ज्योतिर्लिंगों की कथा की शृंखला में आज मैं आपको रामेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा सुनाता हूं. चार धामों में से एक रामेश्वर ज्योतिर्लिंग की शिव महापुराण में जो कथा आती है वह आपसे कहता हूं.

भगवान श्रीराम लंका विजय के लिए सुग्रीव की अठारह पद्म वानरी सेना लेकर समुद्रतट पर आ गए. अथाह और अनंत सागर को देखकर सेना का मनोबल गिरने लगा कि आखिर वह इसे पार कैसे करे.

प्रभु श्रीराम हनुमानजी आदि के साथ विचार-विमर्श करने लगे कि रावण पर विजय के लिए समुद्र लांघकर लंका पहुंचना होगा लेकिन समुद्र लांघने का काम कैसे हो?

इसी चिन्तन के दौरान श्रीराम को प्यास लगी तो उन्होंने पीने के लिए जल माँगा. वानरों ने पीने योग्य मीठा जल लाकर श्रीराम को दिया और प्रभु ने जल प्रसन्नतापूर्वक ले लिया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

वह जल को पीने ही वाले थे कि उन्हें ध्यान आया कि आज तो मैंने भगवान शिव के दर्शन किए ही नहीं हैं. बिना उनके दर्शन किए मैं जल कैसे ग्रहण कर सकता हूँ?

यह विचार आने से श्रीराम ने जल ग्रहण नहीं किया. उसके बाद भगवान ने महादेव के एक पार्थिव लिंग के पूजन का आयोजन किया. विधिवत पूजन की तैयारी की और फिर षोडशोपचार से विधिपूर्वक भगवान शिव की अर्चना की.

श्रीराम ने कहा– उत्तम व्रत का पालन करने वाले हे प्रभु महादेव! आप मेरी सहायता करें. आपकी सहायता के बिना मेरे इस कार्य की सिद्धि होना अत्यन्त कठिन है. रावण भी आपका भक्त है. आपकी कृपा से वह सभी के लिए अजेय है.

आपकी कृपा से वह त्रिभुवन विजयी है. आपसे प्राप्त उत्तम वरदान के अहंकार में चूर रहता है. मैं भी आपका सेवक हूं, आपकी इच्छा का ही अनुसरण करता हूं. सदाशिव! आप कल्याण करें और मेरी सहायता करें. यह पक्षपात उचित नहीं है.

इस प्रकार श्रीराम ने भगवान शिव की प्रार्थना की. उन्होंने भगवान शिव को पूर्णतया सन्तुष्ट करने के लिए अपना गाल बजाकर कुछ अव्यक्त (अस्पष्ट) शब्दों का उच्चारण किया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

उनकी अर्चना वन्दना से प्रसन्न भगवान शिव ज्योतिर्मय महेश्वर के रूप में अपने वामभाग में पार्वती को लिए, अपने सभी पार्षदों के साथ दिव्यरूप धारण किए हुए वहां तत्काल प्रकट हो गए.

महादेव ने कहा– श्रीराम! आपका कल्याण होगा. आप अफनी इच्छा कहें. भगवान शिव के साक्षात दिव्य दर्शन को प्राप्त कर वहां उपस्थित सभी जीव पवित्र हो गए.

श्रीराम ने पुन: महादेव की स्तुति की और रावण के साथ युद्ध में विजयश्री का वरदान मांगा. भगवान महेश्वर ने कहा– श्रीराम! आपकी सदा जय हो. आप अपने मनोरथ को पूर्ण करेंगे.

भगवान शिव से विजय का वर प्राप्तकर श्रीराम ने महादेव से पुन: प्रार्थना की- हे शिवशंकर! यदि आप मुझपर प्रसन्न हैं, तो संसार के लोगों के कल्याण के लिए आप हमेशा यहीं निवास करें.

महादेव ने श्रीराम की प्रार्थना स्वीकार कर ली और कहा मैं ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थित होकर यहां सदैव निवास करुंगा. श्रीराम द्वारा स्थापित ज्योतिर्लिंग की प्रसिद्धि रामेश्वर नाम से हुई.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

उनकी ही कृपा-प्रसाद से अथाह समुद्र को श्रीराम ने अनायास ही पार कर लिया. पृथ्वी पर रामेश्वर सर्वथा भोग और मोक्ष के प्रदाता हैं तथा अपने भक्तों की सभी कामनाओं को पूरा करते हैं.

जो मनुष्य परम गंगाजल से रामेश्वर ज्योतर्लिंग का अभिषेक करता है वह जीवन मुक्त हो जाता है. वह इस संसार में देवदुर्लभ सम्पूर्ण भोगों का उपभोग करने के बाद उस ज्ञान को प्राप्त कर अन्त में कैवल्य (मोक्ष) को प्राप्त कर लेता है.

रामेश्वर तीर्थ हिंदूधर्म के चारधामों में है. इस तीर्थ से जुड़ी एक हनुमान जी की प्रचलित कथा है, जो कल ऐप्प में प्रकाशित हो चुकी है.
अगले भाग में हम वह कथा भी लाएंगे.

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प्रभु शरणम्

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