सोमवती अमावस्या कथा: सोना धोबन के प्रताप से मिटा एक कन्या का वैधव्य दोष. अखंड सौभाग्य दिलाने वाला है सोमवती अमावस्या व्रत

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आज सोमवती अमावस्या है. इसे स्त्रियों को अखंड़ सौभाग्य प्रदान करने वाला बताया जाता है. आज शनि जयंती भी है. शनिदेव का वास भी पीपल में है. इसलिए काला वस्त्र धारण करके पीपल की पूजा करें तो शुभ है. सोमवती अमावस्या व्रत कथाः
एक गरीब ब्राह्मण परिवार की लड़की सुन्दर, संस्कारवान एवं गुणवान भी थी लेकिन गरीब होने के कारण और विवाह योग न होने से उसका विवाह नहीं हो पा रहा था.
एक दिन ब्राह्मण के घर एक साधु पधारे. कन्या ने उनकी खूब सेवा की. साधु उसकी सेवा से प्रसन्न हुए. उन्होंने कन्या का भाग्य पढ़ा तो चिंतित हुए. उसको वैधव्य का योग था इसलिए विवाह नहीं होता था.
ब्राह्मण दम्पति ने उनके चरण पकड़ लिए और पूछा कि कन्या आखिर ऐसा क्या करे कि उसके हाथ में विवाह का योग बन जाए. उनकी विनती से साधु दयालु हो गए.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]
उन्होंने ध्यान लगाया और अपनी अंतर्दृष्टि से पता करके बताया- पड़ोस के गांव में सोना नाम की एक धोबन अपने बेटे और बहू के साथ रहती है. सोना बहुत ही आचार- विचार और संस्कार संपन्न पति परायण स्त्री है.
यदि यह कन्या अपनी सेवा से सोना को प्रसन्न कर ले और सोना धोबिन इसके विवाह में आए और अपनी मांग का सिन्दूर इसे लगा दे तो उसके बाद इस कन्या का विवाह करो तो इसका वैधव्य दोष मिट सकता है.
साधू ने यह भी बताया कि सोना कहीं आती जाती नहीं है. उसे प्रसन्न करने का तुम्हें बहुत प्रयास करना होगा. ब्राह्मणी ने जब सुना कि धोबिन की सेवा से वेटी का वैध्वय दोष मिट जाएगा तो उसे तुरंत अपने पुत्र के साथ सोना की खोज में भेज दिया.
भाई बहन खोजते-खोजते सोना के घर पहुंचे. वहां कन्या तडके ही उठकर सोना धोबिन के घर जाकर सफाई और अन्य सारे काम करके अपने घर वापस आ जाती.
सोना धोबिन ने अपनी बहु की प्रशंसा करते हुए कहा- आजकल तुम तडके ही उठकर सारे काम कर लेती है और पता भी नहीं चलता. बहू आश्चर्य में थी.
बहू ने कहा- मांजी मैंने तो सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे काम ख़ुद ही ख़त्म कर लेती हैं. मैं तो देर से उठती हूं. दोनों सास-बहू उलझन में थीं कि आखिर कौन रोज इनके घर का सारा काम निपटा जाता है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]
रात को सास-बहू दोनों निगरानी में बैठे. धोबिन ने देखा कि एक एक कन्या मुंह अंधेरे घर में आती है और सारे काम चुपचाप निपटाने के बाद चली जाती है. दोनों ने सोचा शायद कोई शापित दिव्य स्त्री हो.
हिम्मत करके एक दिन वह कन्या काम करके जाने को हुई तो सोना ने रोक लिया और पूछा- आप कौन है और इस तरह छुपकर मेरे घर की चाकरी क्यों करती हैं?
कन्या ने साधु द्वारा कही गई सारी बात बता दी. सोना धोबिन ने जब यह सुना था उसे बहुत दया आई. वह पतिपरायण तेजस्वी स्त्री थी. उसने कन्या की सहायता के लिए हामी भर दी.
सोना ने कन्या और उसके भाई को कहा कि जाकर विवाह के आयोजन की तैयारी करो. अमावस्या के दिन उन्होंने विवाह का मूहूर्त रखा. सोना के पति अस्वस्थ थे.
जब ब्राह्मण के घर विवाह की तैयारी पूरी हो गई तो सोना जाने को तैयार हुई. उसने बहू से कहा कि जब तक मैं लौटकर नहीं आती, घर में रहो. यदि कोई अपशकुन भी हो जाए तो मेरी प्रतीक्षा करना.
सोना धोबिन ने जैसे ही अपने मांग का सिन्दूर कन्या की मांग में लगाया, उसके पति का देहांत हो गया. सोना को इस बात का पता चल गया लेकिन उसने शादी निर्विघ्न संपन्न कराके ही विदाई ली.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]
वह यह सोचकर ही बिना जल पीए चली थी कि कहीं रास्ते में पीपल का पेड़ मिलेगा तो उसे भंवरी देकर और उसकी परिक्रमा करके ही जल ग्रहण करेगी.
उस दिन सोमवती अमावस्या थी. ब्राह्मण के घर से मिले पूए-पकवान की जगह उसने ईंट के टुकडों से 108 बार भंवरी देकर 108 बार पीपल के पेड़ की परिमा की और फिर जल ग्रहण किया.
ऐसा करते ही उसके पति के मुर्दा शरीर में कम्पन होने लगा. उसकी बहू अपने ससुर को फिर से जिंदा देखकर बड़ी प्रसन्न हुई और सास की महिमा सबको बताई.
पीपल के पेड़ में सभी देवों का वास होता है. अत:, सोमवती अमावस्या के दिन से शुरू करके जो व्यक्ति हर अमावस्या के दिन भंवरी देता है, उसके सुख और सौभाग्य में वृध्दि होती है.
मान्यता है कि जो स्त्री प्रत्येक अमावस्या को ऐसा नहीं कर पाती, वह भी सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या के दिन 108 वस्तुओं की भंवरी देने के बाद गौरी-गणेश की पूजा करके सोना धोबिन की यह कथा सुनती और दूसरों को सुनाती है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
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