January 29, 2026

विश्वामित्र ने क्रोध में किया अलग सृष्टि की रचना का कार्य आरंभः त्रिशंकु की कथा

vishwamitra guru
राजा हरिश्चन्द्र सूर्यवंश के प्रतापी राजा थे. वह श्रीरामचन्द्र के वंश में 35 पीढ़ी पहले राजा त्रिशंकु के पुत्र थे. राजा विश्वामित्र एक बार संयोग से महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में गए.

विश्वामित्र अपनी पूरी सेना के साथ आए थे. उन्हें किसी ऋषि को कष्ट देने में संकोच हो रहा था लेकिन वशिष्ठ ने उन्हें सेना समेत आश्रम के पास पड़ाव डालने को कहा. विश्वामित्रमान गए.

वशिष्ठ के पास कामधेनु गाय थी. कामधेनु से अक्षय अन्न-धन प्राप्त हो सकता था. उसके प्रताप से वशिष्ठ ने विश्वामित्र का सेना समेत सत्कार किया. विश्वामित्र कामधेनु के प्रताप को देखकर मोहित हो गए.

उन्होंने वशिष्ठ से कहा कि ऐसी अद्भुत गाय तो राजा के पास होनी चाहिए क्योंकि उसे प्रजा का पालन करना होता है. विश्वामित्र ने हजारों हाथी, घोड़े और गाएं देकर बदले में कामधेनु की मांग की.

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