March 26, 2026

वाल्मीकि रामायण

रामायण एक संस्कृत महाकाव्य है जिसकी रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी। हिंदू धर्म में रामायण का एक महत्वपूर्ण स्थान है जिसमें हम सबको रिश्तो के कर्तव्यों को समझाया गया है। इस महाकाव्य में भगवान विष्णु के रामावतार को दर्शाया गया है उनकी चर्चा की गई है। वाल्मीकि रामायण में 24000 श्लोक और 500 उपखंड हैं जो कि 7 काण्ड में विभाजित हैं।

 

रामायण के 7 कांड हैं :-

1) बालकांड
2) अयोध्याकांड
3) अरण्यकांड
4) किष्किन्धाकाण्ड
5) सुंदरकांड
6) युद्धकांड
7) उत्तरकांड

रामायण  का समय विद्वानों की मान्यता अनुसार त्रेतायुग माना जाता है। आदिशंकराचार्य और विद्वानों के मुताबिक भगवान विष्णु का राम अवतार श्वेतवाराह कल्प के सातवें वैवस्वत मन्वन्तर के चौबीसवें त्रेता युग में हुआ था। श्री राम का जीवन काल लगभग 1 करोड़ 83 लाख वर्ष पूर्व का है। इसके वर्णित प्रसंग में भुशुण्डि रामायण, पद्मपुराण,  हरिवंश पुराण,  वायु पुराण, से प्रमाण दिया जाता है।

वाल्मीकि रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि को कुछ लोग व्याध कुल का बतलाते हैं पर वाल्मीकि रामायण तथा अध्यात्म रामायण में इन्होंने स्वयं को प्रचेता का औरस पुत्र कहा है।

मनुस्मृति में प्रचेतसं वसिष्ठं च भृगुं नारदमेव च प्रचेता को वसिष्ठ, नारद, पुलस्त्य, कवि आदि का भाई लिखा है। वाल्मीकि को आदिकवि भी माना जाता है क्योंकि उन्होंने सर्वप्रथम छंदों में एक महाकाव्य की रचना की। इसलिए उनके प्रचेता पुत्र वाली बात ही अधिक उचित लगती है।

महर्षि वाल्मीकि जैसे विद्वानों के संदर्भ में कुल-चर्चा में उलझना उनकी रचना का पूरा आदर न देना होगा। इस अंश में हम आदिकवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण को संक्षेप में पढ़ेंगे.

प्रभु शरणं

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