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भगवान श्रीराम के जीवन गाथा पर आधारित रामकथा सुनाने वाली बहुतेरी कथायें लिखी गयीं. यहां तक कि कबंध नाम के एक राक्षस ने भी कबंध रामायण लिखी. पर सबसे पहले यदि किसी ने कोई रामकथा लिखी तो वह थे श्रीराम भक्त हनुमान.

भगवान श्रीराम रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद अयोध्या लौटकर राजगद्दी संभाली तो जनता की उम्मीदें बहुत बढ गयीं थीं. श्रीराम ने भी जनता की आशाएं पूरे करने के लिये सुशासन के प्रबंध करने में बहुत व्यस्त हो गए.

राज काज में भगवान की व्यस्तता देख श्री हनुमानजी भी शिव धाम कैलाश पर्वत पर तपस्या करने चले गये. हनुमानजी ने वहां भगवान शिव की तपस्या आरंभ की. तपस्या से जो भी समय बचता अपने प्रभु और बीते दिनों को याद करते.

इस दौरान हनुमानजी जो कुछ सोचते उसे हर दिन आस पास के पत्थरों पर अपने नाखूनों से दर्ज करते जाते. भगवान राम के जीवन के कई प्रसंग जो उन्होंने खुद भगवान राम और सीता माता के श्रीमुख से सुने थे वे सब भी वहां दर्ज थे,यह विवरण किसी और के लिये दुर्लभ थे.

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