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भाद्रपद शुक्लपक्ष की सप्तमी के दिन पुत्र प्राप्ति, पुत्र रक्षा तथा पुत्र के उन्नति के लिए संतान सप्तमी व्रत या मुक्ताभरण व्रत किया जाता है. यह पूजा दोपहर तक पूरी कर ली जाए तो अच्छा माना जाता है.

मुक्ताभरण पूजा मुख्यरूप से शिव-पार्वतीजी की पूजा है किंतु जाम्वन्ती के साथ उनके पुत्र साम्ब और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा भी की जाती है.

संतान सप्तमी पूजा की विधिः

* दोपहर में चौक बनाकर उस पर भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमा रखी जाती है.

* उस प्रतिमा का स्नान कराकर चन्दन का लेप लगाया जाता है.

* अक्षत, श्रीफल यानी नारियल, सुपारी अर्पण की जाती है.

* दीप प्रज्वलित कर भोग लगाया जाता है.

* संतान की रक्षा का संकल्प लेकर भगवान शिव को कलेवा बांधा जाता है.

* बाद में इस कलेवा को संतान की कलाई में बांध दिया जाता है. भोग में खीर, पूरी का प्रसाद चढ़ाएं.

* भोग में भगवान विष्णु को तुलसी का पत्ता रख सकते हैं किंतु शिवजी को वह पत्ता न चढ़ावें.

* तुलसीदल को जल से तीन बार घुमाकर भगवान के सामने रखा जाता है.

* उसके बाद पूजा की कथा सुनें. पूजा के बाद भगवान की विधिवत आरती करें.

* फिर भगवान से अपनी मनोकामना रखें. उसके बाद भोग को प्रसाद की तरह ग्रहण करें.
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