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तपोबली मुनियों ने बीज और यज्ञ मंत्रों सहित वेदों का फिर से उद्धार किया. उन ऋषियों में से जिस ऋषि ने अपनी शक्ति से जो भाग निकाला वह भाग उसी ऋषि के नाम से प्रसिद्ध हुआ. सभी मुनि प्रयागराज पहुंचे और प्राप्त वेद को श्रीहरि के सम्मुख ब्रह्माजी को सौंप दिया.

वेदों को पुनः प्राप्तकर ब्रह्माजी बड़े प्रसन्न हो गए. देवों और ऋषियों के साथ उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया. यज्ञ की समाप्ति पर देवताओं ने श्रीविष्णु से विनती की- इसी स्थान पर हमें पुनः प्रसन्नता प्राप्त हुई है, हमें यज्ञ का भोग फिर से मिला है इसलिए आपकी कृपा से यह स्थान श्रेष्ठ और पुण्यदायी हो. यह मास अक्षय फल देने वाला हो.
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