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दक्ष ने असुरों को अपनी पुत्री ख्याति को प्राप्त वरदान के बारे में बताकर कहा कि वे ख्याति को प्रसन्न कर लें ताकि वह उनके घायल सैनिकों को फिर से स्वस्थ कर दें. ख्याति उस समय गर्भवती थीं.
असुरों ने ख्याति की खूब सेवा की. सेवा से प्रसन्न होकर उन्होंने असुरों से वरदान मांगने को कहा. असुरों ने उनसे जीवन का वरदान मांग लिया.
देवता अपने पराक्रम से असुरों को घायल करते और ख्याति उन्हें स्वस्थ कर देतीं. असुर भारी पड़ने लगे तो देवता चिंतित हो गए. वे भगवान विष्णु के शरण में गए.
भगवान ने ख्याति को समझाया कि उनके कार्य से देवताओं पर संकट आ रहा है इसलिए वह ऐसा न करें. लेकिन ख्याति ने कहा कि उन्होंने असुरों को जीवनदान का आशीर्वाद दिया है इसलिए वह असुरों का उपचार बंद नहीं कर सकतीं.
भगवान विष्णु इससे बहुत क्रोधित हो गए. उन्होंने सुदर्शन चक्र से ख्याति के शरीर के दो टुकड़े कर दिए. भृगु ने ख्याति की हालत देखी तो शोक में डूब गए.
उन्होंने भगवान को शाप दिया कि एक गर्भवती स्त्री के प्राण लिए हैं इसलिए उन्हें बार-बार मानवों की तरह किसी स्त्री के गर्भ से जन्म लेकर मृत्यु लोक पर आना पड़ेगा.
भुगृ को क्रोध शांत नहीं हुआ था.
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आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
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प्रियवर बंधु
आपकी कथा विचार करने योग्य है। परंतु आपने गलत ज्ञान दिया है।
विष्णु जी को ही बार बार अवतार इसलिए लेना पड़ता है क्योंकि वो सृष्टि के पालनहार हैं।
और जब मनुष्य जाती पर कोई संकट आता है तब पालनहार होने की वजह से उन्हें ही अवतार लेना पड़ता है।
अच्छा चलो आपकी बात मन भी लें तो इसका कोई सबूत है मतलब ये कथा किस पुराण या वेद में लिखा है। या ऐसे ही कोई कहानी बना दी।
कृपया उत्तर अवश्य दें।
यह कथा पुराण आधारित ही है.