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सुदर्शन ने कहा- मां, आपके चरणों में मेरी भक्ति आजीवन बनी रहे. साथ ही आप इस काशीपुरी की रक्षा हमेशा करती रहें, मेरी बस यही अभिलाषा. आप इसे पूर्ण करें.

जगदंबा ने सुदर्शन से कहा- ऐसा ही होगा. तुम अयोध्या का शासन संभालो. मैं तुम्हारी इच्छा की पूर्ति के लिए काशी में वास करूंगी. जब भी कोई संकट आएगा तो इसकी रक्षा करूंगी.

अपने भक्त सुदर्शन को दिया वचन निभाने के लिए माता जगदंबा काशी नगरी में दुर्गाकुंड में वास करने लगीं और उस समय से आजतक वाराणसी की रक्षा कर रही हैं.

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