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स्वयंवर के लिए सभी राजाओं को न्योता गया पर सुदर्शन को नहीं. शशिकला ने चतुराई दिखाते हुए एक ब्राह्मण द्वारा सपने में देवी मां के संदेश की बात सुदर्शन तक पहुंचवा दी.
उधर युद्धजित अपने नाती शत्रुजित को लेकर स्वयंवर में आ गए. सुदर्शन को शशिकला ने मन ही मन अपना पति चुन लिया है यह बात भी अब तक छुपी नहीं थी. शत्रुजित को इससे क्रोध आया.
उसने सुबाहु को धमकाया कि मैं तुम्हारी और सुदर्शन की हत्या कर शशिकला को उठा ले जाउंगा. सुबाहु घबराए पर देवी के आदेश वाली बात सुनकर कई राजाओं को सुदर्शन के प्रति सहानुभूति हो गई.
उन्होंने सुदर्शन को समझाया कि एक दिन का समय है. अपने प्राणों की रक्षा करो. प्राण रहेंगे तब तो विवाह करोगे. सुदर्शन ने कहा- मैं न तो किसी का बुरा सोचकर आया हूं और न किसी का अहित करुंगा.
मैं तो अपनी आराध्या मां भगवती के आदेश का पालन करने आया हूं, बिना उनके संकेत के कहीं नहीं जाउंगा. मुझे पूरा भरोसा है कि वे मेरी हर तरह से रक्षा करेंगी. वह काशी में ही डटा रहा.
सारे राजा स्वयंवर में सजधज कर आए पर शशिकला ने स्वयंवर में आने से साफ इंकार कर दिया. सुबाहु ने शशिकला को समझाया कि इस तरह स्वयंवर आयोजित करने के बाद तुम्हारे नहीं जाने से क्रोधित राजा आक्रमण कर देंगे.
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