हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:fb]
इन्द्र ने सोचा कि प्रभु कहीं इसे मेरे इन्द्रलोक में न भेज दे. इससे इंद्र भी घबराए. उन्होंने भी प्रभु को विनती लगाई- प्रभु! इस पापी के लिए इन्द्रलोक में भी कोई जगह नही है. आप ऐसा आदेश करके मुझे धर्मसंकट में न डालिएगा.
अब ध्रुवजी को चिंता हुई कि कहीं आखिर में प्रभु इस पापी को ध्रुवलोक में ही स्थान न दे दें. इसका पाप इतना बड़ा है की इसके पाप के बोझ से ध्रुवलोक गिरकर नीचे आ जायेगा. यह लोक भी प्रभु ने ही दिया है इसलिए इसकी रक्षा वही करेंगे.
ऐसा विचारकर ध्रुवजी भी कहने लगे- प्रभु आपने ही ध्रुव लोक प्रदान किया है. आप इस पापी को मेरे पास भी मत भेजिएगा. अन्यथा आपके द्वारा प्रदत्त मेरा ध्रुव लोक इस पापी के कारण संकट में आ जाएगा. रक्षा करिएगा प्रभु.
शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.