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साकेत द्वार ने भगवान से कहा- महाराज! आप भले ही इसका हाथ पकड़ लें पर यह जगतजननी माता सीताजी की निंदा कर चुका है. इसका पाप इतना बड़ा है कि मैं इसे साकेत में प्रवेश की अनुमति नहीं दे सकता.
जिस समय भगवान सब को साथ लिए साकेत की ओर चले जा रहे थे उसी समय सभी देवी-देवता भी आकाश मार्ग से देख रहे थे कि आखिर सीता माता की निंदा करने वाले पापी धोबी को भगवान कहां स्थान दिलाते हैं.
भगवान ने द्वार बन्द होते ही इधर-उधर देखा तो ब्रह्माजी ने सोचा कि कहीं भगवान इस पापी को मेरे ब्रह्मलोक में ही न भेज दें. ब्रह्माजी चिंतित हो गए. हाथ हिला-हिलाकर कहने लगे- प्रभु! इस पापी के लिए मेरे ब्रह्मलोक में कोई स्थान नही है.
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