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वह बोला, हे राजकुमार, मैं निर्धन हूं, मेरी बहुत सी संतानें हैं. आप मेरी दशा को देखें. आपके ही राज में रहता हूं. ब्राह्मण हूं. मेरे ऊपर कुछ कृपादृष्टि फेरिये. कुछ सहायता कीजिये.
त्रिजट का सींक जैसा शरीर देख कर और बहुत सी संतानों की बात सुन कर वन जाने को तैयार भगवान को उस परिस्थिति में भी हंसी सी आ गयी.
बेहद कमजोर देह वाले त्रिजट को देख भगवान को थोड़ी मजाक सूझी. भगवान सब कुछ तो बांट चुके थे, दान दे चुके थे. वे त्रिजट से बोले,विप्रवर आप वहां चरती गायें देख रहे हैं, बस अपना ड़ंडा फेंकिये , जितनी दूर पर आपका ड़ंडा गिरेगा वहां तक की गऊएं आपकी.
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