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राजा को लगा कि यह इंसान बड़ा पेटू है. भगवान के नाम पर अन्न मांग रहा है लेकिन भगवान के नाम पर अन्न मांगा है तो देना ही पड़ेगा.

राजा ने कुढते हुए नौकरों से कहा कि इसे दुगना अन्न दे दो.

पंद्रह दिन बाद फिर से एकादशी आई. वह फिर राजा के पास पहुंचा और इस बार उसने राजा से पिछली एकादशी से भी दुगुना अन्न की मांग कर दी.

इस बार भी उसने कहा कि भगवान भी उसके साथ भोजन करते हैं इसलिए उसके खुद को लिए भोजन कम पड़ जाता है. मुझे तो इस बार अपने लिए और भगवान दोनों के लिए पर्याप्त अन्न चाहिए.

मैं तो आपका सेवक हूं, आप आप आश्रित हूं. इसलिए मेरा पेट भरना आपका दायित्व हैं. भगवान मेरे साथ भोजन करने आते हैं इसलिए उनके लिए भी भोजन का प्रबंध करने का दायित्व आपका ही है.

धर्म यही कहता है. आप धार्मिक हैं तो धर्मोचित व्यवहार करें.

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