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वह गणेशजी से बोला, मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए, लेकिन यदि आप मुझसे कोई इच्छा रखते हों तो कहें मैं आपकी इच्छा पूरी कर दूंगा.

मूषक की गर्वभरी वाणी सुनकर गणेशजी मुस्कुराए और कहा- यदि तुम्हारा वचन सत्य है तो तुम मेरा वाहन बन जाओ. मूषक ने बिना देरी किए ‘तथास्तु’ कह दिया.

गणेशजी उस पर सवार हुए. गजानन के भार से दबकर उसके प्राण संकट में आ गए. उसने गणेशजी से अपना भार कम करके वहन करने योग्य बनाने की विनती की. इस तरह मूषक का गर्व चूरकर गणेशजी ने उसे अपना वाहन बना लिया.

कहते हैं कि पहले चूहे विशालकाय होते थे और मनुष्य से बहुत द्वेष रखते थे. गणेशजी ने मानवकल्याण के लिए चूहे को अपने आश्रय में लिया और उसकी विध्वंसक शक्ति को कम किया. आज भी घरों में चूहों के उत्पात मचाने पर भगवान गणेश को याद किया जाता है.

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