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युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछा- पितामह, राजा का अर्थ होता है जिसके संरक्षण में प्रजा को अन्न, शिक्षा और सुरक्षा की कमी न हो. यदि राजा ने गुरूओं का पोषण कर लिया तो शिक्षा की कमी न होगी.
राजा के पास सैन्यबल को साथ रखने का सामर्थ्य हो तो सुरक्षा की कमी भी न होगी. यदि संपत्ति हो और इंद्र की कृपा बनी रहे तो कृषि कार्य भी हो जाएगा. जिन पर लक्ष्मीजी की कृपा रहती है इंद्र वहां होते ही हैं.
इस तरह देखें तो राजा के ऊपर लक्ष्मीजी की कृपा सदैव बनी रहनी परम आवश्यक है अन्यथा उसका साम्राज्य तुरंत नष्ट हो जाता है. पितामह किन सत्पुरुषों के यहां लक्ष्मीजी निवास करती हैं? यह ज्ञान मुझे दें.
भीष्म ने कहा- पुत्र इस विषय में मैं तुम्हें एक कथा सुनाता हूं. तुम्हारे जैसा प्रश्न देवराज इंद्र ने स्वयं लक्ष्मीजी से ही किया था.
महालक्ष्मी ने इंद्र से इस बारे में जो ज्ञान दिया था, वह तुम्हारे लिए उपयोगी है. महालक्ष्मी ने इंद्र को यह रहस्य बता दिया था कि वह कहां स्थाई रूप से वास करती हैं और किस स्थान का त्याग कर देती है. उसे ध्यान से सुनो.
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