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एकादशी के दिन दही का भोग लगाना चाहिए.

द्वादशी को चिवड़े का भोग लगाने से मां बहुत प्रसन्न होती हैं और भक्त पर अपना प्रेम बरसाती हैं.

त्रयोदशी के दिन चने का नैवेद्य अर्पण करने से संतान सुख प्राप्त होता है.

चतुर्दशी को सत्तू के भोग लगाएं तो मां के साथ भगवान शंकर भी प्रसन्न होते हैं.

पूर्णिमा के दिन मां को खीर का भोग लगाना चाहिए.

अमावस्या के दिन भी वही प्रसाद चढाने का विधान है जो पूर्णिमा के दिन चढाया जाता है.

जिन तिथियों में जो भोग चढाए जाते हैं उसी भोग से हवन भी करना चाहिए. इससे सभी तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं.

ध्यान रहे कि जो चढाया है उसका एक हिस्सा प्रसाद के रूप में लेकर बाकी ब्राह्मण को दान दे देना चाहिए.

नारदजी ने पूछा- प्रभु आपने तिथिवार चढ़ाए जाने वाले भोग की चर्चा की. अब मुझे दिवस के अनुसार माता की प्रसन्नता के लिए अर्पित किए जाने वाले प्रसाद के बारे में बताएं.

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2 COMMENTS

    • आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
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