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लक्ष्मीजी उनकी सरलता पर खुश हो गईं. उन्होंने गोबर को ही अपना अंश स्वीकार किया. इसीलिए पूजा में सबसे पहले गोबर-गणेश की पूजा होती है. गोबर को ऐश्वर्यदायक माना जाता है.

कैसे मनाएं गोपाष्टमी पर्व:

इस दिन प्रातः काल उठकर नित्यकर्म से निवृत होकर स्नान आदि करें.

प्रातः काल में ही गायों को भी स्नान आदि कराकर गौ माता के अंग में मेहंदी, हल्दी, रंग के छापे आदि लगाकर सजाया जाता है.
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