हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:fb]
जिस प्रकार रस्सी की गाठों की दिशा समझकर हम उसे खोल सकते हैं, वैसे ही सभी समस्याएं भी हल कर सकते हैं. हम गांठों की दिशा समझने के बजाय गांठों को अपने कुतर्कों से सही साबित करने में जुट जाते हैं.

गलती सभी से होती है, यह स्वाभाविक है. गलती का आभास होते ही उसमें संशोधन का प्रयास करना चाहिए. जो व्यक्ति जीवन में इतना बड़ा हृद्य दिखा पाता है. मनुष्य अंजाने में गांठें खोलने के बजाय उन्हें कसता जाता है.

परिणाम यह होता है कि मामला सुलझने के बजाय उलझता चला जाता है. गांठें लगने पर भी रस्सी का बुनियादी स्वरूप वही रहता है उसी प्रकार किसी कारण विकार आ जाने पर भी हमारे अंदर की अच्छाई पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती.

हम पुनः शुरुआत कर सकते हैं. जो अपने अहम को किनारे कर सूझबूझ के साथ निर्णय कर पाता है वही सफल हो जाता है. सफलता और असफलता एक दोराहे पर खड़े दिशासूचक हैं. एक रास्ता सफलता की ओर लेकर जाएगा दूसरा असफलता की ओर.
शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here