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सियारिन ने कह दिया- बहन भूख के मारे पेट गुड़गुड़ा रहा है यह उसी की आवाज है. मगर चिल्हो को पता चल गया.
उसने सियारिन को खूब लताडा कि जब व्रत नहीं हो सकता तो संकल्प क्यों लिया था! सियारीन लजा गई पर व्रत भंग हो चुका था. चिल्हो रात भर भूखे प्यासे रहकर ब्रत पूरा की.
अगले जन्म में दोनों मनुष्य रूप में राजकुमारी बनकर सगी बहनें हुईं. सियारिन बड़ी बहन हुई और उसकी शादी एक राजकुमार से हुई. चिल्हो छोटी बहन हुई उसकी शादी उसी राज्य के मंत्रीपुत्र से हुई.
बाद में दोनों राजा और मंत्री बने. सियारिन राानी के जो भी बच्चे होते वे मर जाते जबकि चिल्हो के बच्चे स्वस्थ और हट्टे-कट्टे रहते. इससे उसे जलन होती.
उसने कभी उनका सर कटवाकर डब्बे में बंद करा दिया पर वह शीश मिठाई बन जाती और बच्चों का बाल तक बांका न होता. बार बार उसने अपनी बहन के बच्चों और उसके पति को मारने का प्रयास भी किया पर सफल न हुई. आखिरकार दैव योग से उसे भूल का आभास हुआ.
उसने क्षमा मांगी और बहन के बताने पर जीवित पुत्रिका व्रत विधि विधान से किया तो उसके पुत्र भी जीवित रहे.
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nice to read your post. Really jivitptrika vrat santan ki kaal se raksha karta hai