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जब राजा उस प्रतिमा को महल से बाहर ले जा रहा था तभी उसे महसूस हुआ कि यदि वह मूर्ति को इस प्रकार फेंकता है यो यह प्रतिमा बनाने वाले शिल्पकार का अपमान होगा.
राजा ने प्रतिमा को किसी दूसरे कक्ष में रखने का निर्णय लिया. राजा के ऐसा करने पर सभी देव-देवी राजा को छोड़कर जाने लगे क्योंकि राजा अलक्ष्मी को महल में लाए थे.
धीरे-धीरे भाग्य, सफलता, और ज्ञान की देवियां राजा को छोड़कर चली गईं.
राज्य अपनी गरिमा खोने लगा और एक गरीब राज्य बन गया. प्रत्येक रात एक देवी रोतीं और राजा को छोड़कर चली जातीं.
राजा बहुत परेशान थे और क्या करें यह समझने में असमर्थ. एक रात धर्म के देवता रोने लगे और कहा कि वह राज्य छोड़कर चले जाएंगे.
राजा बहुत चिंतित हुए. राजा ने सोचा कि यदि धर्म देव चले गए तो राज्य की खोई गरिमा कभी नहीं लौटेगी.
राजा ने धर्म देव को किसी भी तरह रोकने का मन बनाया.
उन्होंने धर्मदेव से कहा कि वह अलक्ष्मी की प्रतिमा एक शिल्पकार से लाए थे. अगर वह प्रतिमा फेंक देते तो शिल्पकार की प्रतिभा का अपमान होता, इसलिए उन्होने प्रतिमा नहीं फेंकी.
धर्म देव राजा की इस बात से बहुत खुश हुए और राजा की मदद करने का फैसला किया.
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