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सुनो, मैं इस खूंटे पर हर दिन हथौड़ी मारकर जमीन में इसकी पकड़ मजबूत करता हूं. यदि ऐसा नहीं करता तो इससे जो पशु बंधते हैं उनके खींचतान से या किसी की ठोकर लगने से या जमीन में हल्की सी हलचल से भी यह निकल जाएगा.
ठीक यही काम सत्संग हमारे लिए करता है. वह हमारे मनरूपी खूंटे पर निरंतर प्रहार करता है ताकि हमारी पवित्र भावनाएं मजबूती से जमी रहें.
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