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पति-पत्नी को दमयंती स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. यदि दोनों नहीं कर पा रहे तो किसी एक को भी करना चाहिए. किसी महीने के शुक्लपक्ष के गुरूवार और शुक्रवार से इसका पाठ आरंभ करना चाहिए.
दमयंती स्तोत्रः
ऊं दमयंती नलाभ्यान्च नमस्कारं करोम्यहम्
अविवादो भवेद अत्र कलिदोष प्रशान्तये।
ऐकमत्यम् भवे देशाम् ब्राह्मणानां पृथग्धियाम्
निर्वैरतां च जायेत संवादाग्ने प्रसीद मे।।
-पति-पत्नी दोनों को शिवजी और पार्वती की नित्य पूजा करनी चाहिए. दोनों न करते हों तो कम से कम एक तो अवश्य ही करें.
सौभाग्य स्तोत्र का 1100 बार पाठ करा लेना चाहिए. इसका पाठ थोड़ा कठिन है. उच्चारण में आपको समस्या आएगी इसलिए इसे किसी वैदिक से ही कराएं तो लाभ होगा.
पति-पत्नी को सोने में मोती की अंगूठी अनामिका उंगली में धारण करना चाहिए.
जिस ग्रह के दोष के कारण बाधा आ रही है उसके चतुर्गुणित बीज मंत्र का जप एवं हवन करा देना चाहिए. इसे किसी उत्तम वेदपाठी ब्राह्मण से ही कराना चाहिए.
यदि संबंध बहुत खराब होकर तलाक की नौबत तक पहुंच गए हैं और आपको तत्काल राहत चाहिए तो वांछाकल्पलता का 108 बार पाठ करा लेना चाहिए.
यह पाठ दोषरहित होना आवश्यक है. इसका वैदिक के जानकार किसी योग्य ब्राह्मण से ही कराना चाहिए.
वैदिकों से पूजा के साथ ही साथ किसी योग्य ज्योतिषी के परामर्श पर उस ग्रह की शांति के सरल उपाय पति-पत्नी दोनों या किसी एक को स्वयं भी करते रहने चाहिए.
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