हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.
[sc:fb]
परंतु नचिकेता तो अड़े रहे. यम ने नचिकेता का ध्यान भटकाने के लिए भुवन मोहन अस्त्र का प्रयोग किया. सुर-दुर्लभ सुन्दरियां और समस्त भोग-सामग्रियों का प्रलोभन दिया, पर नचिकेता अडिग रहे.
आखिर यम हार गए. यमराज ने समझ लिया कि यह बालक सचमुच उस ज्ञान को प्राप्त करने का अधिकारी है.
यमराज ने नचिकेता के वैराग्य और भोग-विलास के प्रति अनासक्ति की प्रशंसा की फिर बोले- आप बड़े भाग्यवान हैं. विवेकशील और वैराग्य सम्पन्न पुरुष ही ब्रह्म ज्ञान प्राप्ति के अधिकारी हैं. आप उसके योग्य हैं.
यम ने कहा- आत्मा चेतन है. न जन्मता है, न मरता है. न किसी से उत्पन्न हुआ है और न इससे कोई उत्पन्न होता है. यह अजन्मा, नित्य, शाश्वत और सनातन है तथा शरीर के नष्ट होने पर भी बना रहता है.
यम ने कहा- वह न तो वेद के प्रवचन से प्राप्त होता है न विशाल बुद्धि से मिलता है और न केवल जन्म भर शास्त्रों के श्रवण से ही मिलता है. वह उन्हीं को प्राप्त होता है जिनकी वासनाएं शान्त हो चुकी हैं, कामनाएं मिट चुकी हैं.
आत्म-ज्ञान प्राप्त करने के बाद नचिकेता पृथ्वी पर लौटे तो समस्त तपस्वी समुदाय उनके स्वागत के लिए खड़ा था.
ऋषियों ने कहा- पिता को अनिष्ट रोकने और स्वयं मृत्यु को प्रसन्न कर आत्मा का दिव्य रहस्य प्राप्त करने वाले नचिकेता की पितृभक्ति की कथा तब तक गाई जाएगी जब तक संसार है.
संकलन व संपादनः राजन प्रकाश
अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
ये भी पढ़ें-
आपकी यात्राएं कष्टप्रद हो जाती है ?यात्रा से पहले कर लें ये सरल उपाय
किस राशि के लड़कों के लिए किस राशि की लड़की साबित होती है लकी
करोड़ों करते हैं गंगास्नान, फिर स्वर्ग में क्यों नहीं मिलता सबको स्थान?