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अग्निदेव ने उसे अभीष्ट वरदान दे दिया. रम्भ प्रसन्न होकर अपने महल लौटा. रम्भ महिषी नामक एक असुर कन्या पर मोहित हो गया. उसका शरीर भैंस का था. रम्भ ने महिषी से विवाह कर लिया.

महिषी गर्भवती हुई. एक बार महिषकुल का एक अन्य असुर महिषी पर मोहित हो गया. असुरों में अपहरण कर विवाह करना मान्य होता है. उस असुर ने महिषी का अपहरण कर लिया.

रम्भ ने उस महिष कुल के असुर को युद्ध के लिए ललकारा. दोनों में भयंकर युद्ध हुआ. अंत में रम्भ उस महिष दैत्य के सींगों के गहरे प्रहारों से मारा गया. महिषी अपनी रक्षा के लिए यक्षों की शरण में चली गई.

यक्षों ने शरणागत नारी की रक्षा का निश्चय किया. उन्होंने अपनी संपूर्ण शक्तियां एकत्र कीं और महिष दैत्य पर एक बार में असंख्य विषैले बाणों का प्रहार किया. बाण उसके शरीर के प्रत्येक रोम में धंसे और वह मर गया.

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2 COMMENTS

  1. Its really very nice,
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