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नरकासुर ने तपोबल से ब्रह्मा को प्रसन्न करके यह वर पाया कि उसे देवता, असुर, राक्षस आदि कोई भी नहीं मार सकेगा और उसका राज्य सदा ही बना रहेगा. उसका वध सिर्फ एक स्त्री ही कर सकती थी.

नरकासुर ने हयग्रीव, सुंद आदि असुरों की सहायता से देवराज इन्द्र को जीत लिया. फिर वरुण का छत्र और अदिति के कुंडल ले भागा तथा घोर अत्याचार करने लगा. 16,100 देवपुत्रियों तथा मुनिपुत्रियों को रनिवास में कैद करके रख लिया.

देवमाता अदिति भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा की संबंधी थीं जिन्हें इस घटना की सूचना मिलने पर बहुत क्रोध आया, तथा उन्होंने भगवान कृष्ण से नरकासुर को खत्म करने की अनुमति मांगी.

नरकासुर की मृत्यु एक श्राप के कारण किसी स्त्री के हाथों ही हो सकती थी. सो श्रीकृष्ण ने सारथी का स्थान ग्रहणकर सत्यभामा को नरकासुर से युद्ध का अवसर प्रदान किया.
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