April 15, 2026

श्रीगणेश जी की आरती

गणेश आरतीः

।।श्लोक।।

व्रकतुंड महाकाय, सूर्यकोटी समप्रभाः|

निर्वघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येरुषु सवर्दा||

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जा की पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश देवा…

एकदन्त दयावन्त चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी।।

अन्धन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।।
जय गणेश देवा…

पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ॥

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