April 29, 2026

श्रीगणपत्यअथर्वशीर्षम् मंत्र

।।श्रीगणपत्यअथर्वशीर्षम् मंत्र।।

 

हरि ओम् नमस्ते गणपतये||

त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि|

त्वमेव केवलं कर्ता असि|

त्वमेव केवलं धर्ता असि|

त्वमेव केवलं हर्ता असि||

त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्म असि|

त्वं साक्षात् आत्मा असि नित्यम्।।

ऋतं वच्मि| सत्यं वच्मि ||

अव त्वं माम् | अव वक्तारम्।

अव श्रोतारम् | अव दातारम्|

अव धातारम् | अवानूचामवशिष्यम्||

अव पश्चातात| अव पुरस्तात् |

अवोत्तरात्तात् | अव दक्षिणात्तात्|

अव चोर्ध्वातात अवाधरात्तात् |

सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात्||

त्वं वांग्मयस्त्वं चिन्मयः|

त्वं आनंदमयस्त्वं ब्रह्ममयः|

त्वं सच्चिदानंद अद्वितीयो असि|

त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मा असि|

त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयो असि||

सर्वं जगदिदम् त्वत्तो जायते|

सर्वं जगदिदं त्वत्तस्थिष्ठति|

सर्वं जगदिदम् त्वयि लयमेष्यति|

सर्वं जगदिदम् त्वयि प्रत्येति|

त्वं भूमिरापोSनलोSनिलो नभः|

 

त्वं चत्वारि वाक्पदानि||

त्वं गुणत्रयातीतः।

त्वम कालत्रयातीतः|

त्वं देहत्रयातीतः।

त्वं मूलाधारस्थितोSसि नित्यम्||

त्वं शक्तित्रयात्मकः|

त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यम्|

त्वं ब्रह्मास्त्वं। विष्णुस्त्वं।

रूद्रं त्वम् इंद्रम्। त्वमग्निस्त्वं।

वायुस्त्वं सूर्यं त्वम्।

चंद्रमास्त्वं भूर्भुवःस्वरोम् ||

गणादिं पूर्वमुच्चार्यम्।

वर्णादिं तदनंतरम् |

अनुस्वारः परतरः।

अर्धेंदुलसितम्|

तारेण रुद्धम्|

एतत्व मनुस्वरूपम्|

गकारः पूर्वरूपम्|

अकारो मध्यमरूपम्|

अनुस्वारश्चान्त्यरूपम्|

बिंदुरुत्तररूपम्|

 

नादः संधानम् || संहितासंधि:|

सैषा गणेशविद्या| गणकऋषि:|

निचृदगायत्रीच्छंदः| श्री महाणपतिर्देवता|||

ओम् गं गणपतये नमः ||

 

एकदंताय विद्महे, वक्रतुंडाय धीमहि |

तन्नो दंति: प्रचोदयात् ||

एकदंतं चतुर्हस्तं पाशमंकुशधारिणम् |

अभयं वरदं हस्तैर्बिभ्राणं मूषकध्वजं |

रक्तं लंबोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्।

रक्तगंधानुलिप्तांगम् रक्तपुष्पै: सुपूजितम् ||

भक्तानुकंपिनं देवं जगत्कारणमच्युतम् |

आविर्भूतं च सृष्ट्यादौ प्रकृते: पुरुषात्परम् ||

एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनां वरः ||

नमो व्रातपतये। नमो गणपतये।।

नम: प्रथमपतये। नमस्ते अस्तु लंबोदराय।।

एकदंताय विघ्नविनाशिने शिवसुताय श्रीवरदमूर्तये नमो नमः ||

।।इति मंत्रः।।

जिन की बुध की दशा अच्छी न चल रही हो, उन्हें नौकरी-रोजगार में बहुत परेशानी आती है. उन्हें बुद्धि, धन, ज्ञान, सम्मान एवं यश के देवता गणेश को प्रसन्न करने के लिए गणपत्यथर्वशीर्षम् का पाठ जरूर करना चाहिए.

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स्मरण शक्ति बढ़ाने वाल भी माना जाता है इस मंत्र को. इसलिए विद्यार्थियों के लिए खास तौर से लाभदायक है.

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