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ब्रह्देव ने तारकाक्ष को स्वर्णपुरी, कमलाक्ष को रजतपुरी और विंदुमाली को लौहपुरी दी. तीन पुरों के स्वामी इन त्रिपुरासुरों को लगता था कि अपनी मृत्यु की जो शर्त रखी है वह पूरी हो ही नहीं सकती. इसलिए वे अमर हो चुके हैं.

इस मद में वे आतंक आतंक मचाने लगे. देवताओं को उनके लोकों से भगा दिया. देवगण भोलेनाथ की शरण में गए और अपनी दुर्दशा बताई. महादेव ने नेत्र बंद किए और अपनी अंतर्दृष्टि से देवताओं की दुर्दशा देखी तो उन्हें बड़ा कष्ट हुआ.

उस कष्ट से उनके आंखों से आंसू की बूंदे टपक पड़ीं जिसने वृक्ष का रूप धारण किया. वह वृक्ष रुद्राक्ष के नाम से जाना जाता है. महादेव ने देवों से कहा कि वे सब मिलकर त्रिपुरासुरों के वध का प्रयास करें. देवों का बल बढ़ाने के लिए शिवजी ने अपना आधा बल उन्हें दे दिया.
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2 COMMENTS

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