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ब्रह्माजी तो धर्मसंकट में पड़ गए. प्रसन्न होकर जिसे दर्शन दिए उसे निराश नहीं कर सकते यह विधान है. असुर जो वरदान मांग रहे थे वह दे नहीं सकते. विवश होक एक उपाय सुझाया-अमरत्व तो नहीं दे सकता पर क्यों न तुम अपनी मृत्यु की ऐसी शर्त रख लो जो अत्यन्त कठिन हो.
ब्रह्माजी के समझाने पर तीनों मान गए और माँगा– आप हमारे लिए तीन पुरों (किला) का निर्माण करें. हमारी मृत्यु तभी हो जब ये तीनों पुर अभिजित नक्षत्र में एक ही पंक्ति में आकर खड़े हो जाएं. कोई ऐसा देव या पुरुष जो अत्यन्त शांत अवस्था में ऐसे रथ पर सवार हो जिसकी कल्पना ही नहीं हुई हो. वह हम पर असंभव बाण यानी ऐसे बाण चलाए जिसे आपने बनाया ही न हो.
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Jai Tripurari Prabhu Sada Shiv ki
आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
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