गणपति के बारह चमत्कारिक नाम
ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः
प्रणम्य शिरसा देवं, गौरी पुत्रं विनायकं।
भक्तावासम, स्मरेन्नित्यं, आयुष कामार्थ सिद्धये।।
प्रथम वक्रतुन्दम च , एकदंतं , द्वितीयकम्।
तृतीयं कृष्णापिन्दाक्षम, गजवक्त्रं चतुर्थकम्।।
लम्बोदरं पंचम च, षष्टम विकटमेव च।
सप्तम विघ्नाराजेंद्रम, धुम्रवर्णाम् तथाष्टमम्।।
नवं भाल्चंद्रम च,दशमे तू विनायकं।
एकादशं गंपतिम, द्वादशं तु गजाननं!
द्वादाश्शैतानी, नमानी, त्रिसंध्या ये पठेन्नरः।
न च विघ्नाभायास्य तस्य, सर्वसिद्धि करम परम्।।
विद्यार्थी लभते विद्याम, पुत्रार्थी लभते पुत्रान।
धनार्थी लभते धनं , मोक्षार्थी लेते गतिम्।।
जपेद गणपति स्तोत्रं, षड्भिरमासे फलं लभेत्।
संवत्सरें सिद्धिश च, लभते नात्र शंशय:।।
अश्ताभ्यो, ब्रह्मनेभ्याश्च लिखित्वा यह समर्पयेत।
तस्य विद्या भवेद सर्वा , गणेशस्य प्रसदात्तः।।
नारदपुराण से लिए गए ‘ संकटमोचन’ गणेश स्तोत्र के पाठ से गणेशजी बहुत प्रसन्न होते हैं. यदि आप श्लोक नहीं पढ़ सकते तो में इसमें आए गणपति के बारह नामों का ध्यान करें.
इन नामों के स्मरण से विध्नों का नाश होता है. विद्यार्थियों को विद्या लाभ, संतान इच्छा रखने वालों को संतान प्राप्ति, कारोबारियों को धन लाभ और भय का नाश होता है.
1-वक्रतुंड
2-एकदंत
3-कृष्णापिन्दाक्षम
4-गजवक्त्रं
5-लम्बोदरं
6-विकट
7-विघ्नाराजेंद्रम
8-धूम्रवर्ण
9-भाल्चंद्रम
10-विनायक
11-गणपति
12-गजानन
