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पहर भर रात्रि रहे तो प्रतिदिन उठें. शौचादि से निवृत होकर दातुन लाते समय वृक्ष से कहें- हे वनस्पति हमको आयु, बल, यश, तेज, संतान, द्रव्य, वेदपाठ की शक्ति और बुद्धि दें. इस मंत्र को पढञकर गूलर आदि किसी दूध के वृक्ष की बारह अंगुल लंबी दातुन लाएं.
व्रत के दिन ऐसा न करें. प्रतिपदा, अमावस्या, नवमी, षष्ठी तिथियों और सूर्यवार तथा चंद्र व सूर्य ग्रहण के दिन दातुन न करें. कटेरी, संभालू, कपास, पीपल, वट, अरंड और गंधहीन वृक्षों का दातुन न करें.
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