कर दर्शन व सुप्रभात मंत्र
यदि दिन की शुरुआत ब्रह्मांड की समस्त अलौकिक और लौकिक शक्तियों की स्तुति और उनके आशीर्वाद के साथ हो तो दिन शुभ होता है. इन मंत्रों को अपने दैनिक जीवन में प्रातः काल स्थान देकर देखें, कल्याण होगा.
उठते ही दोनों हथेलियों को आपस में रगड़ने के बाद अपने हाथों का दर्शन करते हुए कर दर्शन मंत्र पढ़ें-
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्।।
(हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी, मध्य भाग में सरस्वती तथा हाथ के मूल भाग में भगवान नारायण निवास करते हैं. प्रातःकाल अपने हाथों का दर्शन करते हुए मैं अपने दिन को शुभ बनाने का आशीर्वाद लेता हूं.)
बिस्तर छोड़ने के बाद धरती पर पैर रखने से पहले पृथ्वी की आज्ञा लें-
समुद्रवसने देवि! पर्वतस्तनमण्डले।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे।
(हे सागर रूपी परिधानों (वस्त्रों) और पर्वत रूपी वक्षस्थल से शोभायमान विष्णुप्रिया धरती माता, मैं अपने चरणों से आपका स्पर्श कर रहा हूं, इसके लिए मुझे क्षमा कीजिए)
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फिर समस्त ग्रहों, ऋषियों लौकिक-अलौकिक शक्तियों की स्तुति कर आशीर्वाद लेने के लिए पढ़ें
सुप्रभातम् मंत्र-
ब्रह्मा मुरारीस्त्रिपुरांतकारी
भानुः शशि भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः
कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।
(ब्रह्मा, मुर का नाश करने वाले मुरारि (विष्णु) और त्रिपुर-नाशक शिव (अर्थात तीनों देवता) तथा सूर्य, चन्द्रमा, भूमिपुत्र मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु ये नवग्रह सभी मेरे प्रभात को शुभ एवं मंगलमय करें.)
सनत्कुमारः सनकः सनन्दनः
सनातनोऽप्यासुरिपिङगलौ च।
सप्त स्वराः सप्त रसातलानि
कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।4।।
(बाल ऋषि सनतकुमार, सनक, सनन्दन और सनातन तथा आसुरि एवं छन्दों का ज्ञान कराने वाले मुनि पिंगल मेरे इस प्रभात को मंगलमय करें। नाद-ब्रह्म के विवर्तरूप सातो स्वर, सातों रसातल मेरा प्रभात शुभ करें.)
सप्तार्णवा सप्त कुलाचलाश्च
सप्तर्षयो द्वीपवनानि सप्त।
भूरादिकृत्वा भुवनानि सप्त
कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।
(सप्त समुद्र, सप्त पर्वत, सप्त ऋषि, सातों द्वीप, सातों वन, भूलोक आदि सातों भुवन ये सभी मेरे प्रभात को मंगलमय करें.)
पृथ्वी सगन्धा सरसास्तथापः
स्पर्शी च वायुज्र्वलनं च तेजः।
नभः सशब्दं महता सहैव
कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।
(अपने गुणरूपी गंध से युक्त पृथ्वी, रस से युक्त जल, स्पर्श से युक्त वायु, ज्वलनशील तेज तथा शब्द रूपी गुण से युक्त आकाश महत् तत्व बुद्धि के साथ मेरे प्रभात को मंगलमय करें अर्थात पांचों बुद्धि-तत्व कल्याणकारी होकर मेरा प्रभात शुभ करें.)
